| Jan 01, 1970 | Daily Report |
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22561. बुंदेलखंड का 'कोरोना वॉरियर': सबसे हल्की PPE किट, 5 बार रहेगी फिट
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
Hindi
Uttar Pradesh
NBT
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- 1. कभी बीहड़ और डकैतों के लिए पहचाने जाने वाले यूपी के बुंदेलखंड ने कोरोना से जंग में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जालौन के उरई निवासी प्रफेसर एसएम इश्तियाक ने देश की सबसे कम वजन वाली पीपीई किट बनाकर यूपी का गौरव बढ़ाया है।
- 2. खास बात यह है कि 290 ग्राम की इस किट को पांच बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार किट को देश में बिक्री के लिए भारत सरकार और डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल गई है।
- 3. अब इसे दूसरे देशों में निर्यात के लिए कोलकाता स्थित भारत सरकार के यूनिक सर्टिफिकेट कोड (यूसीसी) के दफ्तर में आवेदन किया गया है।
- 4. आईआईटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ टेक्सटाइल टेक्नॉलजी में तैनात प्रफेसर ने बताया कि देश में लॉकडाउन लगने के समय वह उरई में थे और कहीं जा नहीं सके। इसी दौरान उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाली और आरामदायक पीपीई किट तैयार करने का आइडिया आया। इसके बाद तुरंत उन्होंने एक परिचित की मदद से कानपुर स्थित एक औद्योगिक इकाई से संपर्क कर कच्चे माल की डिमांड की।
22562. सराहनीय प्रयास:त्रिपुरा में हैंड क्राफ्टेड लीक प्रूफ बांस से बनी बॉटल्स बनाकर शिल्पकारों की सुधरी आर्थिक स्थिति, रवीना टंडन ने अपने ट्विटर अकाउंट से किया इसे प्रमोट
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
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Innovations in Bharat
Hindi
Tripura
Dainik Bhaskar
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- बांस के महत्व को जानते हुए त्रिपुरा में प्रधानमंत्री वन धन योजना और नेशनल बैंबू मिशन स्कीम के तहत गांव वालों को बैंबू प्रोडक्ट बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उनकी हस्तशिल्प कला का पता बांस की फैंसी वाटर बॉटल को देखकर लगाया जा सकता है। इन फैंसी बॉटल्स की बाहरी सतह बांस से बनी होती है। इसकी अंदर की सतह पर कॉपर लाइनिंग देखी जा सकती है।
- दरअसल ये प्रोडक्ट उन आदिवासी लोगों और लोकल आर्टिजन के जीवन को सुधारने का एक प्रयास है जिनके पास अपनी आजीविका चलाने का कोई अन्य साधन नहीं है।
- vबांस से बनी बॉटल्स और झाड़ू के माध्यम से त्रिपुरा के शिल्पकारों को रोजगार देने का श्रेय आईएफएस ऑफिसर प्रसाद राव को जाता है।
22563. कानपुर की आर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री ने बनाया पहला एंटी बैक्टीरियल टेंट
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Innovations in Bharat
Hindi
Uttar Pradesh
Dainik Jagran
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- प्राकृतिक आपदा, रेल और सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों का इलाज अब किसी भी खुली जगह पर जीवाणुओं (बैक्टीरिया) के संक्रमण के खतरे की चिंता किए बिना ही किया जा सकेगा। कानपुर की आर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री ने ऐसा एंटी बैक्टीरियल टेंट बना लिया है जिसमें किसी भी जगह पर मरीजों का संक्रमण मुक्त इलाज किया जा सकता है।
- कपड़े के बने इस टेंट में एंटी बैक्टीरियल फैब्रिक की कोटिंग की गई है। कोटिंग के संपर्क में आने के बाद बाहर ही जीवाणु मर जाते हैं। टेंट की बड़ी खासियत यह भी है कि अधिक तापमान होने पर भी अंदर का तापमान सात से 10 डिग्री तक कम हो जाता है।
- चार मीटर लंबे और दो मीटर चौड़े इस टेंट में दो मरीजों का इलाज किया जा सकता है। महामारी के दौरान अस्पतालों में जगह फुल होने पर भी मरीज के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल पार्क और खुले स्थान पर कर सकते हैं।
- ओईएफ के महाप्रबंधक डीसी श्रीवास्तव ने बताया कि टेंट में जरूरी मेडिकल उपकरण रखने की पर्याप्त जगह है।
- 5. टेंट बनाने की प्रक्रिया के तहत एंटी बैक्टीरियल प्रोसेसिंग करके कपड़े को संक्रमणमुक्त बनाया गया है। फैब्रिक की कोटिंग करके ऐसे तैयार किया गया है कि यह बैक्टीरिया से बचाव के लिए कवच की तरह काम करता है।
- 6. खुले में इलाज के दौरान बैक्टीरिया का संक्रमण मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है। बैक्टीरिया से सुरक्षित होने से यह टेंट उन्हेंं दोगुनी गति से ठीक करने में मददगार साबित होगा। बाहरी संक्रमण का खतरा न होने के रेगिस्तान, पहाड़ और जंगलों में भी कारगर इलाज किया जा सकेगा।
- 7. एंटी बैक्टीरियल टेंट में की गई फैब्रिक की कोटिंग धूल व धुएं के कण को भी रोकने में कारगर है। नजर न आने वाले अतिसूक्ष्म कण भी नहीं घुस सकते।
- 8. यह तकनीक विकसित करने में ओईएफ के वैज्ञानिकों को करीब एक साल का समय लगा।
22564. How these women in Manipur are successfully making candies from wild fruits
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Innovations in Bharat
English
Manipur
East Mojo
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- 1. Some women in the hill district of Ukhrul, Manipur are showing the way on how the wealth of the forest can enhance the livelihood and economic condition of society.
- 2. At least 3,300 women in the district are being trained in making various products, especially candies out of different wild fruits that are easily found in the nearby jungles, under the Van Dhan Vikas Kendra (VDVK), a livelihood scheme for a forest dwellers development area through value addition of tribal products.
- 3. The scheme was initiated by the Union ministry of tribal affairs and Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India (TRIFED).
- 4. Recently, Manipur bagged the first position out of 22 states in the country under the tribal affairs ministry’s VDVK scheme.
- 5. Significantly, Hungpung Kazipphung cluster from Ukhrul, which comprises of 300 women, was adjudged the best VDVK of the year based on their gooseberry candy products and performances.
22565. Serial innovator Kanak Gogoi's builds Rs 40 K tractor to help unemployed
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Innovations in Bharat
English
Assam
East Mojo
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- 1. Serial Innovator Kanak Gogoi's latest offering is a unique, easy to use multipurpose tractor.
- 2. The tractor comes with two detachable ploughs and costs Rs 40,000. It can also be retrofitted with a trailer at an extra cost.
- 3. Gogoi said that the necessary materials used in the making could easily be bought in the market and all one needs to do is assemble it.
- 4. Gogoi is a well-known name in the innovator arena of India. In the year of 2009, he won the national award for his gravitational bicycle, which uses compressed air as fuel
22566. India’s first-ever COVID-19 blockchain platform - BelYo launched
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Startups in Bharat
English
India
CNBC
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- 1. Global blockchain start-up BelfricsBT, along with YoSync, a startup incubated at IIITB-IMACX Studios, has signed a research collaboration in agreement with IIIT Bangalore to jointly develop India’s first COVID-19 blockchain platform, BelYo.
- 2. The project has been funded by the Mphasis F1 Foundation as a part of their larger outreach programme to tackle the pandemic in India.
- 3. BelYo uses the BelfricsBT Belrium blockchain platform to convert COVID-19 related clinical and vaccination data of citizens currently from the physical form into digital assets that can be retrieved by any contact tracing apps like Aarogya Setu via APIs.
- 4. The platform aims to reach out to ICMR approved 730 government labs and 270 private labs starting August second week.
22567. दो महिलाओं की पहल:बेंगलुरु की शैला गुरुदत्त और लक्ष्मी भीमाचार ने आईबीएम की नौकरी छोड़ी, बिजनेस की शुरुआत कर बनाए ऐसे बर्तन जिन्हें खा भी सकते हैं
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Innovations in Bharat
Hindi
Karnataka
Dainik Bhaskar
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- 1. इनकी कंपनी का नाम एडिबल-प्रो है, जो इको फ्रेंड्ली और जीरो वेस्ट खाने योग्य कटलरी बनाती है।
- 2. इसमें कांटे, छुरी, चम्मच, प्लेट, कटोरी के अलावा 80 से अधिक प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। इनकी कीमत सामान्य ही है जिसमें खाने की प्लेट और कटोरी भी एक मीठी डिश होती है।
- 3. बेंगलुरु में एफएसएसएआई प्रमाणित प्रयोगशाला द्वारा कटलरी के नमूनों को मंजूरी मिलने के बाद ही उन्होंने आधिकारिक तौर पर कंपनी पंजीकृत कराई।
- 4. सभी उत्पाद बाजरा, अनाज, दाल और मसालों से बने हैं और सीधे स्थानीय किसानों से लिए जाते हैं।
22568. IIT मद्रास के पुर्व छात्र ने बनाया अनोखा अस्पताल, फोल्ड करके कहीं भी ले जा सकते हैं
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Innovations in Bharat
Hindi
Tamil Nadu
The Better India
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- 1. इस स्टार्टअप ने एक ऐसा हॉस्पिटल यूनिट डिज़ाइन किया है जिसे फोल्ड किया जा सकता है और कहीं भी लाया ले जाया सकता है।
- 2. ख़ास बात है कि इस यूनिट को चार लोग मिलकर दो घंटे के अन्दर कहीं भी सेट-अप कर सकते हैं। इसका नाम मेडीकैब (MediCAB) है।
- 3. इस इनोवेटिव आइडिया को हकीकत बनाने वाले स्टार्ट-अप का नाम है मोडयुल्स हाउसिंग सोल्यूशन। यह IIT मद्रास के एक पूर्व छात्र का स्टार्टअप है। कोरोना काल में दूरगामी क्षेत्रों के लिए यह बहुत ही बेहतर साधन साबित हो सकता है।
- 4. सीईओ श्रीराम रविचंद्रन बताते हैं कि यह फोल्डेबल पोर्टेबल अस्पताल चार जोन में बना है जिसमें एक डॉक्टर का कमरा, एक आइसोलेशन रूम, एक मेडिकल रूम / वार्ड और एक ICU शामिल हैं।
22569. किसानों के लिए औज़ार बनाते हैं यह दसवीं पास इनोवेटर, तिपहिया ट्रैक्टर के लिए मिला अवार्ड!
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Innovations in Bharat
Hindi
Gujarat
The Better India
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- 1. गुजरात में अमरेली के रहने वाले 40 वर्षीय उपेंद्र भाई राठौर पिछले लगभग 15 सालों से किसानों के लिए उनकी ज़रूरत के हिसाब से औज़ार बना रहे हैं।
- 2. उपेंद्र भाई ने बुलेटसांती को और थोड़ा एडवांस करके इसे सनेडो ट्रेक्टर का रूप दिया। यह एक तिपहिया ट्रेक्टर है जो किसानों के लिए काफी मददगार है, खासतौर पर छोटे किसानों के लिए।
- 3. उपेंद्र भाई बताते हैं कि उनके इस ट्रेक्टर की मांग भारत के साथ-साथ अफ्रीका जैसे देशों में भी है।
- 4. इसकी कीमत 1 लाख 37 हज़ार रुपये से 1 लाख 60 हज़ार रुपये के बीच है।
22570. आंध्र-प्रदेश के राजेंद्र प्रसाद का अनोखा आविष्कार, मटके को बिना छुए निकाल सकते हैं पानी!
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Innovations in Bharat
Hindi
Andhra Pradesh
The Better India
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- 1. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में रहने वाले 34 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद द्वारा बनाए गए ‘पेडल वाटर टैप’ की हर जगह सराहना हो रही है। कुछ दिन पहले, जल शक्ति मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट करते हुए उनकी तारीफ़ की।
- 2. ‘वाटर पेडल टैप’ से आपको मटके या फिर किसी भी पानी के बर्तन को छूने की ज़रूरत नहीं है। आप सिर्फ अपने पैर से टैप करके पानी ले सकते हैं।
- 3. इसे चलाने के लिए बिजली की ज़रूरत नहीं है, यह सौर ऊर्जा पर काम करता है। एक दिन में आपको इससे 500 से 700 लीटर शुद्ध पानी मिल सकता है।
- 4. लॉकडाउन में उन्होंने ‘वाटर पेडल टैप’ के अलावा पॉट सोलर वाटर प्यूरीफायर भी तैयार किया है। इसकी कीमत महज 5200 रुपये है। वहीं ‘वाटर पेडल टैप’ को आप 700 रुपये में खरीद सकते हैं।
- 5. 15 वाटर पेडल टैप सिस्टम आंध्र-प्रदेश और ओडिशा बॉर्डर पर रहने वाले आदिवासियों के यहाँ मुफ्त में लगा रहे हैं।